ज़रा सी फैलीं स्याही ज़रा से बिखरे ग़म à¤ी है,
शायरी केवल अल्फ़ाज़ नहीं इसमें छिपे कुछ हम à¤ी है...!!
ज़रा सी फैलीं स्याही ज़रा से बिखरे ग़म à¤ी है,
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